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Quick revision notes

दशमः पाठः: दशमः कः? (Daśamaḥ Kaḥ?) Quick Revision Notes Class 8th Sanskrit (दीपकम्)

Class 7 · Sanskrit (दीपकम्) · Chapter 10 : दशमः कः? · All Board · All Medium · 0 views

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🧮 पाठ का परिचय
Ten boys counting each other near river after crossing
✏️ दस बालक नदी के किनारे एक-दूसरे को गिन रहे हैं
अयि भोः! गतसप्ताहे संस्कृतओलम्पियाड्-परीक्षा अभवत् । दशमः कोऽस्ति भोः ?
दशमस्य विषये वयं न जानीमः श्रीमन् !
चिन्ता मास्तु, वयम् अद्य दशमस्य विषये एकां कथां पठामः ।
🔵 हिन्दी: अरे! पिछले हफ्ते संस्कृत ओलम्पियाड परीक्षा हुई थी। (स्थानों की चर्चा के बाद शिक्षक पूछते हैं:) 'दसवाँ कौन है?'
हम नहीं जानते सर!
चिन्ता मत करो — आज हम 'दसवाँ कौन' इस विषय पर एक कहानी पढ़ते हैं।
💡 पाठ की शुरुआत ओलम्पियाड परीक्षा की चर्चा से होती है। फिर एक बोधकथा आती है।
✦ ✦ ✦
📖 कहानी — दशमः कः? (पद-दर-पद)
एकदा दश बालकाः स्नानाय नदीम् अगच्छन् । ते नदीजले चिरं स्नानम् अकुर्वन् । ततः ते तीर्त्वा पारं गताः ।
🔵 हिन्दी: एक बार दस बालक नहाने के लिए नदी में गए। उन्होंने नदी के पानी में काफी देर तक नहाया। फिर वे तैरकर उस पार चले गए।
💡 साधारण शुरुआत — दस बालक नदी तैरते हैं।
तदा तेषां नायकः अपृच्छत् — अपि सर्वे बालकाः नदीम् उत्तीर्णाः ? तदा कश्चित् बालकः सर्वान् पङ्क्तौ स्थापयित्वा अगणयत् — एकं, द्वे, त्रीणि, चत्वारि, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव इति ।
🔵 हिन्दी: तब उनके नायक (नेता) ने पूछा — क्या सभी बालक नदी पार हो गए? तब एक बालक ने सभी को पंक्ति में खड़ा करके गिना — एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह, सात, आठ, नौ।
💡 बालक ने खुद को गिनना भूल गया! इसीलिए नौ ही गिन पाया।
सः आत्मानं न अगणयत् । अतः सः अवदत् — अरे वयं नव एव स्मः भोः ! दशमः नास्ति । अपरः अपि बालकः पुनः आत्मानं त्यक्त्वा अन्यान् बालकान् अगणयत् । तदा अपि नव एव आसन् ।
🔵 हिन्दी: उसने खुद को नहीं गिना। इसलिए उसने कहा — अरे हम तो सिर्फ नौ हैं! दसवाँ नहीं है। दूसरे बालक ने भी खुद को छोड़कर बाकी को गिना — तब भी नौ ही निकले।
💡 जब हम गिनते हैं तो खुद को भूल जाते हैं। यही समस्या है।
अतः ते निश्चयम् अकुर्वन् यत् दशमः नद्यां मग्नः । ते विषण्णाः तूष्णीम् अतिष्ठन् ।
🔵 हिन्दी: इसलिए उन्होंने यह निश्चय कर लिया कि दसवाँ नदी में डूब गया। वे दुखी होकर चुपचाप खड़े रहे।
💡 विषण्णाः = दुखी। तूष्णीम् = चुपचाप। बालक बहुत उदास हो गए।
तदा कश्चित् पथिकः तत्र आगच्छत् । सः तान् बालकान् दुखितान् दृष्ट्वा कारणम् अपृच्छत् । ते अवदन् — 'अस्माकं दशमः मित्रं नद्यां मग्नम् ।' पथिकः अवदत् — 'चिन्तां मा कुर्वन्तु। आगच्छन्तु, अहं दशमं दर्शयामि ।' पथिकः प्रत्येकस्य मस्तके एकं-एकं घातं दत्वा अगणयत् — एक, दो ... दश ।
🔵 हिन्दी: तब एक राहगीर वहाँ आया। उसने उन दुखी बालकों को देखकर कारण पूछा। उन्होंने कहा — 'हमारा दसवाँ मित्र नदी में डूब गया।' राहगीर ने कहा — 'चिन्ता मत करो। आओ, मैं दसवाँ दिखाता हूँ।' राहगीर ने एक-एक के सिर पर थप्पड़ मारकर गिना — एक, दो... दस।
💡 पथिकः = राहगीर। उसने बाहरी दृष्टि से गिना — तो दस निकले।
पथिकः अवदत् — 'पश्यन्तु ! दशमः त्वम् एव असि !' गणयिता सः अवदत् — 'अहो ! सत्यम् ! अहम् एव दशमः अस्मि !'
🔵 हिन्दी: राहगीर ने कहा — 'देखो! दसवाँ तुम खुद ही हो!' गिनने वाले ने कहा — 'अरे! सच है! मैं ही दसवाँ हूँ!'
💡 दशमः त्वम् एव = दसवाँ तुम खुद ही हो। यही वेदान्त का सन्देश है।
💡 शिक्षा — वेदान्त का सन्देश

🌟 कहानी का गहरा अर्थ:

  • जैसे बालक खुद को गिनना भूल गया — वैसे हम आत्मा को भूल जाते हैं।
  • तत्त्वमसि (तुम वही हो) — उपनिषद् का महान् वाक्य।
  • अहम् ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ) — यही वेदान्त का सार।
  • जैसे राहगीर ने 'तुम ही दसवें हो' कहकर सच बताया — वैसे गुरु शिष्य को आत्मज्ञान देता है।
📚 @edugrown | दीपकम् | कक्षा ७

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