✦ चतुर्थः पाठः ✦
न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्
Fox and Grapes — Sanskrit to Hindi Explanation
📚 संस्कृत हिन्दी व्याख्या | दीपकम् | कक्षा ७ | @edugrown
📋 विषय-सूची
🦊 पाठ का परिचय
✏️ लोमड़ी भूखी-प्यासी वन में भटकती है और अंगूर के लिए बार-बार कूदती है
🎵 गीत — एकः शृगालः (पद-दर-पद व्याख्या)
एकः शृगालः वनं गच्छति ।
पिपासा, तस्य बुभुक्षा
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति ।
पिपासा, तस्य बुभुक्षा
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति ।
🔵 हिन्दी: एक लोमड़ी वन में जाती है।
प्यास और भूख (से पीड़ित),
वह प्यास और भूख से व्याकुल होकर वन में जाती है।
प्यास और भूख (से पीड़ित),
वह प्यास और भूख से व्याकुल होकर वन में जाती है।
💡 लोमड़ी भूखी-प्यासी है। पिपासा = प्यास। बुभुक्षा = भूख।
तत्र गच्छति, किमपि न लभते
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते ।
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते ।
🔵 हिन्दी: वहाँ जाती है, कुछ भी नहीं मिलता।
और आगे जाती है, फिर भी कुछ नहीं मिलता।
थकी हो जाती है, दुखी हो जाती है।
और आगे जाती है, फिर भी कुछ नहीं मिलता।
थकी हो जाती है, दुखी हो जाती है।
💡 श्रान्तः = थका हुआ। खिन्नः = दुखी। लोमड़ी थक गई, निराश हो गई।
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति
स्वेदः जायते, तृषा जायते ।
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति
स्वेदः जायते, तृषा जायते ।
🔵 हिन्दी: बाईं ओर देखती है, दाईं ओर देखती है।
आगे देखती है, पीछे देखती है।
पसीना आता है, प्यास होती है।
आगे देखती है, पीछे देखती है।
पसीना आता है, प्यास होती है।
💡 चारों दिशाओं में खोजती है — पर कुछ नहीं मिलता। थकान बढ़ती है।
पश्यति द्राक्षालताम्
सः पश्यति द्राक्षाफलम्
उपरि उपरि लतासु दृश्यते च तत्फलम्
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते ।
सः पश्यति द्राक्षाफलम्
उपरि उपरि लतासु दृश्यते च तत्फलम्
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते ।
🔵 हिन्दी: वह देखती है अंगूर की बेल।
वह देखती है अंगूर के फल।
ऊपर-ऊपर बेल पर वे फल दिखते हैं।
उसी पल उसके मुँह में पानी आता है (लार आती है)।
वह देखती है अंगूर के फल।
ऊपर-ऊपर बेल पर वे फल दिखते हैं।
उसी पल उसके मुँह में पानी आता है (लार आती है)।
💡 द्राक्षालता = अंगूर की बेल। अनुक्षणम् = उसी क्षण। फल देखते ही मुँह में पानी।
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति
त्रिवारम् उत्पतति, पुनः पुनः उत्पतति
स्वेदः जायते, तस्य श्रमः जायते ।
त्रिवारम् उत्पतति, पुनः पुनः उत्पतति
स्वेदः जायते, तस्य श्रमः जायते ।
🔵 हिन्दी: एक बार कूदती है, दो बार कूदती है।
तीन बार कूदती है, बार-बार कूदती है।
पसीना आता है, थकान होती है।
तीन बार कूदती है, बार-बार कूदती है।
पसीना आता है, थकान होती है।
💡 उत्पतति = कूदती है। बार-बार कोशिश करती है पर फल तक नहीं पहुँच पाती।
आम्लं द्राक्षाफलम् आम्लं द्राक्षाफलम्
इत्येवं कथयति, सः पलायते ।
इत्येवं कथयति, सः पलायते ।
🔵 हिन्दी: 'अंगूर खट्टे हैं! अंगूर खट्टे हैं!'
यह कहकर वह भाग जाती है।
यह कहकर वह भाग जाती है।
💡 आम्लम् = खट्टा। पलायते = भाग जाती है। जो नहीं मिला उसमें कमी निकाल दी।
💡 शिक्षा और अतिरिक्त श्लोक
🎯 कहानी की शिक्षा:
जब हम कोई काम नहीं कर पाते तो उसमें कमी निकालना — यह कमज़ोरी का लक्षण है। हार मत मानो — प्रयास जारी रखो।
प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः ।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति ।।
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः ।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति ।।
नीच, मध्यम और उत्तम — तीनों की परीक्षा कठिनाइयों में होती है।
नीच लोग विघ्न के डर से शुरू नहीं करते | मध्यम लोग विघ्न आने पर छोड़ देते हैं | उत्तम लोग बार-बार विघ्न आने पर भी कभी नहीं छोड़ते।
गच्छन् पिपीलको याति योजनानां शतान्यपि ।
अगच्छन् वैनतेयोऽपि पदमेकं न गच्छति ।।
अगच्छन् वैनतेयोऽपि पदमेकं न गच्छति ।।
चलती हुई चींटी सैकड़ों कोस जाती है, न चलने वाला गरुड़ एक कदम नहीं जाता।
सतत प्रयास करने वाला छोटा भी बड़े लक्ष्य पाता है। चींटी = सतत प्रयास | गरुड़ = प्रयास न करना।
📚 @edugrown | दीपकम् | कक्षा ७